पहली मुलाकात 

       फिर वो पहली मुलाकात का दिन
       बीती यादों की बरसात का दिन।

       प्रीत की महकी हुई प्यास का दिन
       अधरों की छुअन के इतिहास का दिन।

       फिर वो भूले हुये जज़्बात का दिन
       एक महके हुये पारिजात का दिन।

       आँसुओं में बहे संत्रास का दिन
       एक भीगे हुये एहसास का दिन।

       बहकी साँसों के प्रभास का दिन
       फिर तेरी चाह के उदभास का दिन।

       प्रीत की पहली उषा, विश्वास का दिन
       सूर्य की सोंधी चमक,आभास का दिन।

        credit:  शिवमोहन सिन्हा