ये पल जैसे थम सा गया है ये वक़्त जैसे ठहर सा गया है आज हैं हम एक दूसरे के साथ वो मेरे सामने हम उनके सामने | हज़ार बातें हैं मन में कई सवाल है दिल में आज जो है पहले न थी दिल की हालत ऐसी… हम लबों से कह न पाए उनसे हाल-ए-दिल कभी और वो समझें नहीं ये ख़ामोशी क्या चीज़ है…. कुछ न कहे बस चुप रहे खामोशियाँ ही कह जाये थम जाये ये जहां और पल भी ठहर जाये… रहे न कुछ भी दरमियाँ मिटे ये सारी दूरियाँ मिल के भी है अधूरी सी ये दास्ताँ…